सब कुछ
प्रेम ही तो है
.
.
दिल की धड़कन
हाँथ का कंगन
आंखों में कजरा
बालों में गजरा
हया की लाली
कानों की बाली
विरह की पीड़ा
मिलन का आनंद
.
.
शून्य से अनंत तक
इस धरा से उस गगन तक
.
.
मौजूद हर चीज़
प्रेम ही तो है.....!!
अंकित तिवारी
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
संसद भवन में स्थापित सेंगोल का क्या इतिहास है ?(पांच हजार पूर्व का इतिहास )
पीएम नरेंद्र मोदी जी का एक और ऐतिहासिक फ़ैसला जिसने हमारे पूज्य प्रधानमंत्री जी के गौरव के साथ - साथ भारत के भी सम्मान को भी बढ़...
-
हटाती है जब वो पेशानी से अपनी जुल्फ़ें लज़ाकर ख़ुद ही अपनी नज़रें झुका लेती है सुना है वो आजकल लेकर अपने लबों से मेरा नाम ख़ुद ही ख़ुद से लज...
-
कोई कितना बोले मन के भाव लिख ही डालो मन सांसारिक भावनाओं को त्याग देना चाहता है अब , हृदय विहीन ही जीना सीखना चाहता है । लेकिन डर भी है , ह...
-
बात है सन 2005 की, हाईस्कूल पास किया था और यही वो वर्ष था जब मैंने अपना घर परिवार सब कुछ छोड़ दिया था। उसके कुछ कारण हैं जो बाद में फिर कभी। ...
No comments:
Post a Comment