नन्हे नन्हे पांव में वो अपने
महावर लगाती है
बीच में फ़िर उसके वो
एक नन्हा चाँद भी बनाती है
फ़िर पहन कर पायल वो
दबे पांव मेरे क़रीब आती है
देखूँ जो मैं उसका चेहरा उठाकर
तो वो हया की मूरत बन जाती है
बस इतना बता दो हमको तुम
ये अदाएं कहाँ से लाती हो..!!
अंकित तिवारी
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