Sunday, November 1, 2020

प्रेम कविता

इस धरा पर

घटित

होने वाली

सभी

क्रियाओं को

जब

बांधा गया है


एक

तय सीमा

के दायरे में


तो फ़िर

प्रेम को

क्यों नहीं

बांधा गया

किसी सीमा

के दायरे में...!!

-तिवारी जी

प्रेम कविता

वो करती है

तुमसे

बेइंतहा प्रेम


प्रेम में...वो

अपना सर्वस्व

त्याग कर

तुम्हारे पास आई है


उसे अपने

मतलब के

हिसाब से

इस्तेमाल कर

दुत्कार देना


उस स्त्री के

साथ साथ

उस प्रेम

का भी

अपमान है

जो उसने

तुमसे किया था...!!

Saturday, May 2, 2020

वो .. बस वाली लड़की

उस दिन अमन को ऑफिस में काम की वज़ह से बहुत देर हो गई थी और
लगभग 8 बज गए थे .. वो अपना बैग समेटकर जल्दी से बस स्टैंड की ओर
भागा .. जैसे ही वो बस स्टैंड पहुंचा तो देखा कि बस निकलने वाली थी ..
उसने भाग के जल्दी से बस में चढ़ गया और एक सीट ढूंढने लगा .. और
किस्मत से उसको एक सीट मिल भी गई .. वो हांफते हुए अपनी सीट पे बैठ गया .. भागकर आने की वज़ह से उसकी सांस फूल रही थी .. तो उसने
हड़बड़ाते हुए अपने बैग से पानी की बोतल निकालनी चाही .. 

लेकिन ये क्या ..? जल्दबाज़ी की वज़ह से आज उसकी पानी की बोतल
ऑफिस में ही रह गई थी ..

तभी किसी ने पीछे से एक प्यारी सी आवाज़ में कहा
“शायद आपको पानी की ज़रूरत है” और उसने बोतल आगे बढ़ा दी
उसने जल्दी से उसके हाँथ से बोतल ली और पानी पीने लगा ..

पानी पीने के बाद उसने बोतल वापस की और उसको थैंक्यू बोलकर
वो अपने कानों में इयरफोन लगा रेडियो सुनते हुए खिड़की से बाहर
देखने लगा ..

कुछ देर बाद उसका स्टॉप आ गया तो वो उतर गया..

अगले दिन फिर से वो ऑफिस के बाद बस स्टैंड पहुँचा और जैसे ही
बस में चढ़ा .. उसे एक ख़ाली सीट दिखी और वो उस सीट पर बैठ गया
और रोज़ की तरह कान में इयरफोन लगा कर वो रेडियो सुनने लगा और बाहर की ओर देखने लगा .. इतने में एक बच्ची उसके पास आकर बैठ
गई .. और थोड़ी ही देर बाद वो अपनी माँ से ज़िद करने लगी कि उसे भी
खिड़की के पास बैठना है .. तो उसकी माँ ने अमन से कहा कि क्या वो
उसकी सीट पे बैठ जाएगा .. अमन ने हां कर दी और उठकर उस महिला
की सीट पर बैठ गया .. 

लेकिन ये क्या उसने देखा कि जिस सीट पर महिला बैठी थी उसी पर
वो कल वाली लड़की भी बैठी हुई है .. तो अमन मन ही मन ख़ुश हुआ
और ये सोचते हुए की “ये उसकी क़िस्मत है या भगवान की मर्ज़ी” उसके
पास बैठ गया

कल तो जल्दबाजी की वजह से उसने उस लड़की की तरफ़ कोई ध्यान न
दिया था .. पर आज उसने जब उसकी ओर देखा तो वो सुंदर नैन नख़्स
वाली एक सुंदर सी लड़की थी .. जिसने अपने कानों में आर्टिफिशियल
झुमके पहन रखे थे जो बस में बैठे होने के कारण जब हिलते तो उसकी
खूबसूरती में चार चाँद लगा देते ..

मन ही मन अमन सोचने लगा कि वो उस से उसका नाम पूछे लेकिन दिल
डर रहा था .. फिर उसने उस से पानी की बोतल मांगनी चाही उसने जब
अमन की ओर देखा तो उन दोनों की नज़रें मिलीं और अमन ने डर के गर्दन
घुमा ली ..

वो मन ही मन सोचने लगा “अमन तू पागल है क्या .. लगता है बस में ही
मार खायेगा .. और उसने डर कर उस से बात करने की ख़्वाहिश छोड़ दी
और चुपचाप बैठ कर अपने स्टॉप के आने का इंतज़ार करने लगा .. फिर
स्टॉप के आते ही बस से उतरते हुए उसने सोचा कि एक बार और दीदार
कर लूं .. और उसने जैसे ही गर्दन घुमाई तो ये क्या .. उसके चेहरे पर एक
अलग ही गुस्सा दिख रहा था .. तो अमन ने डर कर अपना सर झुकाया और
अपने घर की ओर निकल गया

रास्ते भर वो यही सोचता रहा कि लगता है उसने कोई गलती कर दी है
और रात भर वो यही सोचता रहा .. किसी तरह रात कटी और सुबह वो
ऑफिस पहुंच गया .. पर आज उसका काम में मन ही नहीं लग रहा था

शाम को ऑफिस से निकलकर .. वो बस स्टॉप पहुंचा तो वो बस तो थी
पर वो नहीं थी जिसको अमन आज ढूंढ रहा था .. उसने उस बस को जाने
दिया .. और अगली बस का इंतज़ार करने लगा .. और इस तरह उसने 3 बसें जाने दीं .. फिर वो सोचने लगा कि हो सकता है कि आज वो आयी ही
न हो या हो सकता है कि वो जल्दी निकल गई हो .. 

और वो उदास मन से अगली बस में बैठ गया .. और थोड़ी ही देर में वो लड़की जिसका अमन इंतज़ार कर रहा था .. वो भी भागकर बस में चढ़
गई .. उसे देख अमन का चेहरा खिल गया और दिल जोरों से धड़कने लगा
मानो वो ही भाग कर आया हो .. 

और फिर वो चुपचाप आकर अमन की बगल वाली सीट जो कि खाली थी
उस पर बैठ गई .. और आज फिर से अमन का दिल करने लगा कि वो उस
से बात करे पर दिमाग सोच रहा था कि भाई अमन तू दो दिन साथ के सफ़र
करने को ज्यादा सीरियसली नहीं ले रहा है .. और अमन दिल की जगह दिमाग़ की बात सुन के चुप चाप बैठ गया और अपने स्टॉप का इंतज़ार करने
लगा .. और जैसे ही उसका स्टॉप आया वो बस से उतरकर एक बार उसको देखकर अपने घर चला गया और अगले दिन का इंतज़ार करने लगा

अगले दिन अमन जैसे ही बस स्टैंड पहुँचा और बस में चढ़ा तो देखा कि वो
बस में पहले से बैठी है .. उसने हाँथ हिलाते हुए अपने पास वाली खाली
सीट पर आकर बैठने को कहा .. अमन तो मानो जैसे इसी पल का इंतज़ार
कर रहा था .. वो ख़ुश होकर उसकी पास वाली सीट पर जाकर बैठ गया
और बस चल दी

तो आज उस लड़की ने ही मुस्कुराते हुए कहा

जी .. आप बोलते भी हो या .. गूंगे हो ..
अमन ने कांपती हुए बोला .. जी .. जी नहीं .. बोलता हूं न!
ये सुनकर वो खिलखिला कर हंस पड़ी और कहने लगी की तीन दिन से
आप जो बोलना चाह रहे हो वो तो बोल नहीं पा रहे और कहते हो कि
बोलते हो ..
तो अमन ये सुनकर हड़बड़ा गया .. और कहने लगा कि .. जी! नहीं ..
ऐसी तो कोई बात नहीं है ..
तो उसने गुस्से से अमन की ओर देखा और बोली .. अच्छा!
और चुप हो गई
तो अमन ये सोचने लगा कि ओह्ह! ये क्या बोल दिया उसने
और फिर थोड़ी देर बाद उसने हिम्मत जुटा के बोला .. जी आपका नाम
क्या है .. तो वो हंसने लगी और बोली कि बस नाम पूछने के लिए इतना
डर रहे थे .. और बोली .. गायत्री ..

अमन मन ही मन सोचने लगा .. कितना सुंदर नाम है .. जैसा नाम है
वैसी ही ख़ुद भी है .. और फ़िर थोड़ी देर बाद उसने फिर से हिम्मत
जुटाई और कहा .. जी .. कुछ बोलना था .. आपसे

उसने घूरकर अमन की तरफ़ देखा और बोली कि .. अभी तो आप बोल
रहे थे कि कुछ नहीं बोलना है .. तो

ये सुनकर अमन चुप हो गया .. और फिर जब उसका स्टॉप आने ही वाला
था .. तो वो कहने लगी .. स्टॉप आने के बाद ही बोलोगे क्या ..
ये शब्द सुनकर .. अमन बस इतना ही बोल पाया ..

“आप पसंद हो मुझे”

और इतना बोलकर अमन चुप हो गया .. और लड़की की तरफ़ देखा तो
उसका चेहरा गुस्से से था और उसकी आंखें लाल हो गईं थीं

अमन सोचने लगा .. भाई आज तो काम हो गया .. यहीं सारी बस मिलकर
मारेगी उसे .. और उसका सारा इश्क़ का भूत उतर जाएगा .. पर उसने देखा
की वो शांत हो गयी है और कुछ नहीं कर रही है .. फिर जैसे ही अमन का
स्टॉप आने वाला था उसके हांथों पर उस लड़की के हाँथ महसूस हुए और
उसने धीरे से कहा

क्या .. मुझे .. ज़िंदगी भर .. पसन्द करोगे

क्या ये हाँथ ज़िंदगी भर के लिए थामोगे .... अमन ने मुस्कुरा कर बस अपनी
गर्दन हां में हिला दी और एक बार आंख से आंख मिलाकर दीदार कर अपने
स्टॉप पर उतर गया ..










Thursday, April 30, 2020

एक पत्र तुम्हारे नाम

!! एक पत्र तुम्हारे नाम !!

मुझे तो ये भी समझ नहीं आ रहा कि तुम्हें किस नाम से बुलाऊँ
वो नाम जिस नाम से मैं तुम्हें बुलाता था..या वो जो तुम्हारा नाम
है..मुझे तो अब शायद तुम्हें “मेरी प्यारी” कहकर बुलाने का भी
हक़ नहीं रहा..  ख़ैर.. मैं भी न कितना बड़ा बुद्धू हूं ..देख रही हो
तुम्हें पत्र लिख रहा हूँ फिर भी तुमको ताने मारने से बाज़ नहीं आ
रहा.. जैसे पहले करता था और फिर तुम गुस्सा हो जाया करती थी

आज कई महीनों के बाद अचानक से न जाने क्यों तुम्हारी बहुत
ज्यादा याद आई... हालांकि याद तो तुम रोज़ आती हो .. फिर भी
आज न जाने क्यों तुम्हारी याद बहुत आई.. बहुत कोशिश
की तुमसे बात करूं..या तुम्हें व्हाट्सएप पर मेसेज ही कर दूं ..
पर हिम्मत ही न कर पाया ..

तुम अब भी वैसी ही हो या कुछ बदल गई हो .. अरे! मैं तुम्हारी
आदतों के बारे में बात कर रहा हूं .. वो तुम्हारा मुझसे बात करते
करते सो जाना .. 
और ख़ुद जल्दी उठकर मुझे भी जल्दी उठा देना .. भले ही मेरी
छुट्टी ही क्यों न हो .. और हां वो पुराने गानों की लिस्ट अब भी है
तुम्हारे पास या अब तुमने सुनना बंद कर दिया है ..

तुम कहा करती थी न कि मैंने हिंदी साहित्यिक से पढ़ाई की है
तो उसका उपयोग क्यों नहीं करता हूँ 
मैं लिखता क्यों नहीं हूं .. और मैं हँसकर ये सब टाल देता था .. तो
तुम कहती थी कि अरे! कम से कम डायरी ही लिख लिया करो

तो अब क़रीब 6 महीने से मैं लिखने लगा हूँ .. हां बस जो दिल
में आता है वही सब लिख देता हूँ ..

तुम्हें पता है! तुम्हारा वो दिया हुआ परफ्यूम अब भी मेरे पास है 
हालांकि ख़ाली हो गया है .. पर मैंने उसका खाली डिब्बा रखा हुआ
है .. मुझे पता है तुम ये सब पढ़ोगी तो हँसोगी .. और हां वो तुम्हारी
दी हुई सफ़ेद शर्ट .. जब मैं तुम्हारे जन्मदिन पर तुम्हारे घर आया
था .. तब तुमने दी थी .. वो भी रखी हुई है .. हालांकि मैं तब से
कमज़ोर हो गया हूं .. 
तो अब फिट नहीं आती है .. हां! हां! मुझे पता है तुमने भी मेरा
दिया हुआ वो लाल सूट और वो जब मैं हरिद्वार गया था तब वहां
से जो तुम्हारे लिए झुमके लाया था वो रख रखे होंगे तुमने ..

उम्मीद करता हूँ माँ और पापा अच्छे होंगे .. और अब माँ के
घुटनों का दर्द भी ठीक होगा .. 
और हां अब तो तुम सरकारी अध्यापिका हो गई होगी .. मैं तुम्हारे
लिए बहुत ख़ुश हूँ ..

आशा करता हूँ तुम भी बहुत ख़ुश होगी बस अपना व माँ पापा का
ख़्याल रखना ..

तुम्हारा अंकित उर्फ चश्मिश

Tuesday, April 21, 2020

बोलो! तुम लौट तो आओगी न,, मेरे मरने से पहले

खो न जाएं
वो सब चीजें
जो तुमसे जुड़ीं हैं
तुम्हारे लौट कर
आने से पहले,

बस यही सोचकर
हर चीज़ को सहेज
कर रख रहा हूँ

बस फ़िक्र ये
लगी रहती है की
कहीं गर जो मेरे मरने
के बाद तुम लौटी तो
मेरी सहेज कर रखी
चीजों को तुम खोज
भी पाओगी या नहीं..‼

Friday, April 10, 2020

कमरा खाली कहाँ है ?

नहीं, ये कमरा खाली नहीं है
बस यहां किसी की आवाजाही नहीं है
हैं यहां दफ़न कई राज
कई ज़ज्बात
न जाने कितने आंसू
कितनी ही यादें
मेरी तन्हाई
तेरी रुसवाई
मेरा कुछ सामान
टूटा हुआ दिल
टूटा हुआ भरोसा
एक इश्क़ नाकाम
और “मैं”

नहीं, ये कमरा खाली नहीं है .!!

Friday, April 3, 2020

सोनू और अनोखी

बात है सन 2005 की, हाईस्कूल पास किया था और यही वो वर्ष था जब मैंने अपना घर परिवार सब कुछ छोड़ दिया था। उसके कुछ कारण हैं जो बाद में फिर कभी।
अभी मैं यहां जो लिख रहा हूँ उस से शायद आपको पता चले मेरे लिए रिश्ते कितने महत्व रखते हैं और इस सबके बाबजूद आज हर रिश्ते से दूर हूं।

हाईस्कूल करने के बाद जब घर से अलग हुआ तो बात आयी आगे की पढ़ाई पूरी करने की। तो छोटी मोटी जॉब पकड़ के आगे की पढ़ाई शुरू की। फिर बात आई की खाली समय कैसे व्यतीत करना है क्योंकि जहां रहने गया था वहां कोई जानता तो नहीं था। तो समझ आया कि घर मे कोई छोटा सा जानवर ले आया जाए।

तो अगले दिन जाकर मार्किट से 2 छोटे छोटे खरगोश घर ले आया। और उन दोनों के नाम रख दिये एक का सोनू और दूसरी का अनोखी। अब काम से आने के बाद और पढ़ाई करने के बाद जो समय मिलता उनके साथ व्यतीत करता।

इस से मुझे भी अच्छा लगने लगा खालीपन भी नहीं लगता था। रोज का यही रूटीन बन गया। काम पे जाना और घर आकर पढ़ाई करना और उसके बाद जो समय मिलता वो समय अपने छोटे छोटे से खरगोशों के साथ व्यतीत करना।
फिर धीरे धीरे वो बड़े होने लगे सारा रूम में रहते पूरे रूम को गंदा करते रहते थे रात को मेरे बिस्तर पे साथ ही सो जाते थे।

फिर ऐसे ही एक दिन मैं रात को सो गया और वो दोनों भी मेरे साथ ही सो गए सुबह हुई उठा तो जो कि आदत थी मेरी सबसे पहले उठकर अपने उन दोनों बच्चों को देखना और उनको खाने को देना तो उस दिन भी मैंने उन दोनों के लिए जो शाम को घास लाया था साफ करके डाली और उन दोनों को ढूंढने लगा पर सोनू तो सामने ही घूम रहा था पर अनोखी नहीं दिख रही थी कहीं। मैंने रूम में इधर उधर देखा पर वो कहीं नहीं दिखी फिर मैंने दरवाजे के पीछे देखा तो वहां पर छुपी बैठी थी एक दम ख़ामोश से और डरी सहमी सी। मुझे लगा शायद रात को अकेली हो गयी होगी तो यहां बैठी है। मैंने उसको उठाया और हाथ मे लेकर उसको सहलाया और घास के पास बैठा दिया और जाकर अपने नित कार्य मे लग गया। ब्रश करने के बाद जब आया तो देखा अनोखी वैसे ही डरी सी सहमी बैठी है कुछ खा भी नहीं रही थी। तो मैंने उसको तुरन्त उठाया और अपने हाँथ में लेकर साइकिल उठायी और एक हाँथ से साइकिल चलाकर उसको पास के ही जानवर के अस्पताल ले गया जहां डॉ ने उसको देखा और बोला कि शायद इसको रात को बिल्ली ने डराया है शायद अब ये जिंदा न बचेगी।
मैं उदास हो गया और डॉ को बोला डॉ साहब देखो कुछ दवा दो न शायद बच जाए तो उन्होंने उसे एक इंजेक्शन लगा दिया और बोले इसे ले जाओ और मैं ले आया घर पे उसको पर घर लाते लाते उसकी मौत हो चुकी थी।

उस दिन मैं दोपहर तक उसको अपने हांथों में लिए रोता रहा और फिर उसके बाद उसको वहीं सामने पार्क में जाकर दफ़न कर दिया और सोनू को जो कि अब अकेला रह गया था उसको भी मैं जहां से लाया था वही दे आया था क्योंकि मैं जानता था कि अब ये भी अकेला नहीं बचेगा।

अनोखी के मरने के बाद एक हफ्ते तक न मैंने कुछ खाया था न ही कहीं गया था बस रूम में ही पड़ा रहता और रोता रहता था। उस दिन के बाद तय किया कि अब किसी को अपने दिल से नहीं लगाऊंगा।

बस ऐसा हूं मैं क्योंकि मैं कभी रिश्तों के साथ खिलवाड़ नहीं करता फिर चाहे वो इंसान हो या कोई पशु। जिसको अपने दिल से लगाता हूं पूरी शिद्दत से लगाता हूं।

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संसद भवन में स्थापित सेंगोल का क्या इतिहास है ?(पांच हजार पूर्व का इतिहास )

पीएम नरेंद्र मोदी जी का एक और ऐतिहासिक फ़ैसला जिसने हमारे पूज्य प्रधानमंत्री जी के गौरव के साथ - साथ भारत के भी सम्मान को भी बढ़...