Tuesday, September 20, 2022

अपने घर में लगाएं ये 7 पेड़ -पौधे

 अपने घर में लगाएं ये 7 पेड़ -पौधे (वास्तु टिप्स )

यदि आपको लग रहा हो की आपके घर की ऊर्जा नकारात्मक हो गयी है, तथा आपके घर के लोगों को बार -बार नजर लगने की समस्या आ रही है, तो आप इन १० पौधो से अपने घर में सकारात्मक ऊर्जा ला सकते है | दोस्तों घर में पेड़ - पौधे होने से वैसे भी घर जिवंत रहता है , ऐसी मान्यता है की जिस घर में पेड़ पौधे न हो तो उस घर में जड़ता आ जाती है | पौधे जीवन को सम्बोधित करते है |

तो आइये जानते है ऐसे कौन से पौधे है, जो आपके जीवन में और आपके घर में शुभता लातें हैं |

1. अशोक का पेड़ 

 
ऐसी मान्यता है की अशोक का पेड़ घर की सारी समस्याओं का निदान करने में सक्षम है | अशोक का पेड़ भगवान् श्री कृष्ण को भी अधिक प्रिय है | किसी भी सुबह कार्य में कलस स्थापना में भी अशोक के पेड़ के पत्ते प्रयोग एम् लाये जाते है |
दोस्तों अशोक का पेड़ घर के आस -पास लगाना बहुत ही शुभ माना जाता है तथा अशोक का पेड़ घर में लगे अशुभ पेड़ो का दोष भी समाप्त कर देता है  |

नारियल का पेड़ 


दोस्तों नारियल जितना शुभ होता है नारियल का पेड़ भी उतना ही शुभ होता है | नारियल को श्रीफल भी कहा जाता है , अर्थात ये माता लक्ष्मी को अति प्रिय फल है | नारियल का पेड़ घर में होने से माता लक्ष्मी की कृपा हमारे  घर पे हमेसा बनी रहती है | नारियल का पेड़ घर में होने से हमें कार्यों में सफलता प्राप्त होता है तथा हमारे कार्य  को मान -सम्मान प्राप्त होता है |

अनार का पेड़ 

 
दोस्तों अनार का फल माता रानी को अधिक प्रिय है | एक कथा के अनुसार माता रानी का नाम रक्तदन्तिका भी पड़ा है , जिसम उन्होंने अनार के फलों का सेवन किया है | आनर का पेड़ तथा फल माता रानी का आशीर्वाद है | अनार के पेड़ को आग्नेय कोण में लगाना अशुभ माना जाता है |

अस्वगंधा का पेड़ 


दोस्तों अस्वगंधा तो आपने खाया भी होगा | अस्वगंधा हड्डियों के लिए बहुत ही अच्छा माना गया है | अस्वगंधा में अधिक मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है | अस्वगंधा का प्रयोग दिम्माग को तेज करने में भी किया जाता है | वास्तुशास्त्र के मुताबिक अस्वगंधा का पेड़ सभी प्रकार के वास्तुदोषों से निजात दिलाता है

हल्दी का पेड़ 


हल्दी स्वस्थ्य सम्बन्धी कई समस्याओं से हमें निजात दिलाता है | वैसे ही हल्दी का पौधा वस्तु दोषो से भी निजात दिलाता है |

केला का पौधा 


केला का पौधा भगवन विष्णु और माता लक्ष्मी को अति प्रिय है | इसे लगाने से भगवन विष्णु का आशीर्वाद हमें प्राप्त होता है |

तुलसी का पौधा 


सनातन धर्म में तुलसी के पौधे का अधिक महत्वा है | ऐसी मान्यता है की तुलसी के पौधे को घर में रखने मात्र से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है | हर में तुलसी के ११ पौधे लगाए |



दोस्तों हमारी जानकारी आपको कैसे लगी अवस्य बताये | हम आपकी सहायता कर रहे है ताकि आप पौधो की महत्व को समझ पाए | ये सारे पौधे हर्ब्स है | लेकिन हम इसका दवा नहीं करते | हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुँचाना इसके किसी भी उपयोग की जानकारी स्वम उपयोगकर्ता की रहेगी |

दोस्तों वैसे भी पेड़ - पौधे हमारे घर को और सुन्दर ही बनाते है | तो सुन्दर पौधो को घर में स्थान दीजिये | अपने आस - पास स्थान दीजिये |
धनयवाद 

 

Plant these 7 trees in your house (Vastu Tips)

If you are feeling that the energy of your house has become negative,  then you can bring positive energy in your home with these 7 plants. Friends, due to having trees and plants in the house, the house remains alive anyway, it is believed that in a house where there are no trees, then inertia comes in that house. Plants refer to life.

So let's know which are such plants, which bring auspiciousness in your life and in your home.

1. Ashoka tree

 
It is believed that Ashoka tree is capable of solving all the problems of the house. Ashoka tree is also more dear to Lord Shri Krishna. The leaves of Ashoka tree are also used in the establishment of Kalas in any auspicious  work.
Friends, planting Ashok tree around the house is considered very auspicious and Ashok tree also eliminates the defects of inauspicious trees in the house.

Coconut tree


Friends, the coconut is as auspicious as the coconut tree is equally auspicious. Coconut is also called Shriphal, that is, it is very dear to Godess Lakshmi. Having a coconut tree in the house, the blessings of Goddess Lakshmi always remain in our house. Having a coconut tree in the house gives us success in work and respect.

pomegranate tree

 
Friends, the fruit of pomegranate is more dear to Godess durga. According to a legend, the name of Godess durga is also known as Raktdantika, in which she has consumed pomegranate fruits. Pomegranate tree and fruit are the blessings of Godess Durga. Planting a pomegranate tree in an igneous angle is considered inauspicious.


Ashwagandha tree


Friends, you must have eaten ashwagandha too. Ashwagandha is considered very good for bones. Ashwagandha is rich in calcium. Ashwagandha is also used to sharpen the mind. According to Vastu Shastra, Ashwagandha tree gets rid of all kinds of Vastu defects.


Turmeric tree


Turmeric gives us relief from many health related problems. Similarly, turmeric plant also gets rid of material defects.

banana plant


Banana plant is very dear to Lord Vishnu and Godess Lakshmi. By applying it, we get the blessings of Lord Vishnu.

Tulsi plant


Tulsi plant has more importance in Sanatan Dharma. It is believed that keeping Tulsi plant in the house pleases Goddess Lakshmi. Plant 11 Tulsi plants in each.


 Our purpose is only to provide information, any use of it will be the information of the user himself.

Friends, anyway trees and plants make our house more beautiful. So give place to beautiful plants in the house. Give space around you.


thank you.
 

कई बीमारियों को दावत देता है यूरिक एसिड

 कई बीमारियों को दावत देता है यूरिक एसिड 

 

 

(यूरिक एसिड प्यूरिन की अधिक मात्रा में सेवन से बढ़ता है )

यूरिक एसिड क्या है ?


जब किसी वजह से किडनी की फ़िल्टर करने की क्षमता कम हो जाती है तो यूरिया यूरिक एसिड में बदल जाता है | यूरिक उसके बाद हमारे शरीर में हड्डियों के बिच जमा होने लगता है | यूरिक हमारे द्वारा खाये जाने वाले खाद्य पदार्थो से ही बनता है | जिसमे की बैंगन , अरबी की सब्जी आदि आते है , इसके लिए आप हमारा लेख पढ़े जिससे की आपको अधिक जानकारी प्राप्त हो और हम आपकी सहायता कर पाए | 


यूरिक एसिड के बढ़ने से हमारे शरीर के मासपेशियो में दर्द होता है तथा सूजन की समस्या रहती है |
अगर इसका इलाज समय पर नहीं किया गया तो गठिया , गाउट और भी भयानक बीमारियां होने की संभावना होती है |

कैसे पहचाने की यूरिक एसिड बढ़ा है ?

 
यूरिक एसिड के बढ़ने के कारन शरीर में दर्द, जॉइंट्स में अकरण  जिसके कारन हमारे रोजाना के काम में परेशानियां  आनी सुरु हो जाती है | बहोत जायदा यूरिक एसिड के बढ़ने से गुर्दो की बीमारी , बोन का डैमेज होना तथा ये ह्रदय रोग का भी कारन बन सकता है |

मुख्य लक्षण क्या हो सकते है 


पीठ दर्द
शरीर के किसी भी भाग या जॉइंट्स में दर्द |
बार बार पिशाब का आना |
उलटी जैसा अनुभव होना भी कारन हो सकता है |
अगर ऐसे लक्षण दिखे तो तुरंत अपने डॉक्टर की सलाह ले और टेस्ट करवाए |

यूरिक एसिड में इन चीजों को खाने से करना चाहिए परहेज |
यूरिक की शिकायत होतो आप फ़ास्ट फ़ूड , मिल्क तथा आइसक्रीम जैसे चीजों से दुरी बना ले |
अलकोहल का सेवन बिलकुल भी न करे |
यूरिक एसिड की शिकायत होने पर पानी अधिक- अधिक से पियें |
यूरिक एसिड की शिकायत होने पर नॉन -वेज का सेवन बिलकुल भी न करें |
साथ में सब्जियों में जैसे पालक , अरबी , पत्ता गोभी आदि सब्जियों का सेवन भी न करे क्युकी इसमें प्रोटीन पाया  जाता है |

हमारा लेख जानकारी का दावा नहीं करता है |
बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें
धनयवाद |


 Uric acid treats many diseases

 

 

(Uric acid increases with high intake of purines)


What is uric acid?


When the kidney's ability to filter is reduced for some reason, urea turns into uric acid. Uric then starts accumulating between the bones in our body. Uric is made from the foods we eat. In which brinjal, arbi vegetables etc. come, for this you should read our article so that you can get more information and we can help you.


The increase in uric acid causes pain in the muscles of our body and there is a problem of inflammation.
If it is not treated on time, then there is a possibility of arthritis, gout and even more terrible diseases.

How to know if uric acid is increased?

 
Pain in the body due to the increase of uric acid, due to which the problems in our daily work start coming in the joints. Too much uric acid can lead to kidney disease, bone damage, and heart disease.

what can be the main symptoms



back pain .
Pain in any part or joint of the body.
Frequent urination .
Feeling like vomiting can also be the reason.
If you see these symptoms, consult your doctor immediately and get tested.

Avoid eating these things in uric acid.


If you have a complaint of uric, you should stay away from things like fast food, milk and ice cream.
Do not consume alcohol at all.
If you have complaints of uric acid, drink more and more water.
If you have a complaint of uric acid, do not consume non-veg at all.
Also, do not consume vegetables like spinach, arbi, cabbage etc. because protein is found in it.

Our article does not claim information.
Contact a doctor for more information about the disease.
Thank you.

 


 

 

 

राम नाम की महिमा

 राम नाम की महिमा

राम नाम की महिमा क्या है ये तो हम सभी जानते है | राम नाम की महिमा को बताने के लिए हम कबीर के पुत्र कमाल की कथा  बता रहे है | कबीर ने कमाल को तुलसी जी के पास भेजा | तुलसीदास जी ने तुलसी के पत्र पर राम नाम को लिखा और उसे पानी में डाल दिया | इस जल को पिने से ५०० कोढ़ियों के कोढ़ ठीक हो गए | राम नाम की इतनी महिमा है |

एक बार राजा जनक नर्क के पास से गुजर रहे थे , तभी उन्हें आवाज आए राजा जनक , राजा जनक | राजा जनक रुके और उस पुकार की ओर चलने लगे | कुछ दूर चलने पर उन्हें नर्क दिखा , उन्होंने वहाँ  जा कर यमराज कौन है ये लोग ओर इतने दुखी क्यों है ? यमराज ने कहा ये सब पापी है जो पाप की सजा काट रहे है | राजा जनक ने उनसे कहा इनकी सजा कैसे काम होगी | यमराज ने कहा  एक राम नाम से इनके सारे पाप कट जायेंगे | तभी राजा जनक ने एक राम नाम का दान दे दिया ओर सारा का सारा नर्क खाली हो गया |
राम नाम की इतनी महिमा है |

एक बार हनुमान जी को भी राम नाम की महिमा ने एवं राम से उन्हें बचाया था |
सूरदास ने नदी बह रहे एक शव के कान में जाकर राम नाम लिए ओर वो जीवित हो गया | राम नाम की इतनी महिमा है |
भगवान् श्रीकृष्ण स्वम कहते है, की जिसको भी कलयुग में सुख शांति चाहिए उसे राम नाम की शरणागति लेनी चाहिए |
भगवान् राम के नाम की महिमा ये है की , जो वस्तुएं दुर्लभ है देवताओं के लिए भी उसे भी प्राप्त किया जा सकता है सिर्फ राम नाम के द्वारा |
राम नाम की इतनी महिमा है  की , सतयुग में जो तप से , त्रेता में यज्ञ से , द्वापर में दान से जो फल मिलता है वो कलयुग में राम नाम का सिर्फ स्मरण करने से मिलता है |
राम नाम भगवान् शिव को भी अधिक प्रिय है , जो व्यक्ति राम नाम भगवान् के सामने लेता है भगवान् शिव उसे भक्ति प्रदान करते है |
राम नाम को तारक मन्त्र भी कहा जाता है जिसे १०८ बार जपने से सरे मनोकामना पूरी हो जाती है |   

 

Glory of Ram Naam

We all know what is the glory of Ram Naam. To tell the glory of the name of Ram, we are telling the story of Kamal, the son of Kabir. Kabir sent Kamal to Tulsi ji. Tulsidas ji wrote the name of Ram on the pot of Tulsi and put it in the water. By drinking this water, the leprosy of 500 lepers was cured. There is so much glory in the name of Ram.

Once King Janak was passing through Hell, when he heard the voice of King Janak, King Janak. King Janak stopped and started walking towards that call. After walking some distance, they showed hell, they went there and who is Yamraj, why are these people so sad? Yamraj said that all these are sinners who are serving the punishment of sin. King Janak told them how their punishment would work. Yamraj said that all their sins will be cut away by the name of BS One Ram. Then King Janak donated a name of Ram and all the hell of Sara became empty.
There is so much glory in the name of Ram.

Once Hanuman ji was also saved by the glory of Rama's name and from Rama.
Surdas went to the ear of a dead body flowing in the river and took the name of Ram and he became alive. There is so much glory in the name of Ram.
Lord Shri Krishna Swami says that whoever wants peace and happiness in Kali Yuga should take refuge in the name of Ram.
The glory of the name of Lord Rama is that things which are rare even for the gods can be obtained only by the name of Rama.
There is so much glory in the name of Rama that, in the golden age, the result obtained by penance, in Treta by sacrifice, in Dwapar by charity, is obtained by simply remembering the name of Rama in Kaliyuga.
Lord Shiva is also more dear to the name of Ram, the person who takes the name of Ram in front of the Lord, Lord Shiva gives him devotion.
Ram Naam is also called Tarak Mantra, which is chanted 108 times, all the wishes are fulfilled.
 

मोक्ष का द्वार खोलता है तुलसी का पौधा

 मोक्ष का द्वार खोलता है तुलसी का पौधा

 

 
हिन्दू धर्म में तुलसी पूजन का बहुत महत्वा है , ऐसी मान्यता है की तुलसी के पौधे में माँ महालक्ष्मी का वास होता है |
माता तुलसी के पास सुबह शाम पूजा करने तथा दीपक जलाने से माता तुलसी उसपे प्रसन्न होती है | कार्तिक माह में तुलसी पूजन का विशेष महत्व है | कहते है की कार्तिक माह में ये महत्व और अधिक बढ़ जाता है | इस माह में तुलसी की पूजा करने से विशेष करने से फल की प्राप्ति होती है | इसी माह में तुलसी और सालिग्राम की पूजा का भी विशेष महत्वा है, क्युकी इसी माह में तुलसी माता तथा भगवान् शालिग्राम  का विवाह हुआ था |
शास्त्रों में ऐसा वर्णन है की अगर मृत्यु के समय व्यक्ति के मुँह में तुलसी का पत्ता रख दिया जाए , व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है |
ऐसी मान्यता है की कार्तिक माह में तुलसी का पौधा लगाने से व्यक्ति की साड़ी मनोकामनाएं पूर्ण होती है |
स्नान आदि से निवृत  होकर यदि तुलसी माता की पूजा अर्चना कर उनकी परिक्रमा करने पर माता लक्ष्मी उसपे प्रसन्न होती है | तुलसी घर में होने से पवित्रता बनी रहती है 


तुलसी का पूजन करने से भक्त का शरीर अनेक चंद्रयण व्रतों का फल के सामान पवित्र हो जाता है |
जल में तुलसी डाल कर नहाने से अनेक तीर्थो में नहाने का पुण्य फल प्राप्त होता है |
तुलसी का पौधा घर और आँगन में होने से घर में शांति बनी रहती है  |
तुलसी का पौधा घर में होने से माँ लक्ष्मी की कृपा सदा घर वालो पे बनी रहती है |
प्रतिदिन तुलसी का पौधा दही और चीनी मिक्स करके करके सेवन करने से बहुत लाभ प्राप्त होता है |
तुलसी घर के सरे वस्तु दोष को ख़तम कर्म में सहायक है | 


तुलसी साक्षात् महालक्ष्मी का ही अवतार है | एक समय की बात है , माता महालक्ष्मी को श्राप के कारन धरती लोक पर तुलसी के रूप में जन्म लेना पड़ा | तब भगवान् विष्णु ने महालक्ष्मी के इस तुलसी रूप को आशीर्वाद दिया की तीनो लोको में तुम्हारी युग युगो तक पूजा होती रहेगी | 


माता तुलसी के पास कौन सी चीज नहीं रखनी चाहिए |

तुलसी के पास जुटे - चप्पल नहीं रखने चाहिए |
तुलसी के पास झाड़ू नहीं रखनी चाहिए |
तुलसी के पास गंदे कपडे नहीं होने चाहिए |
तुलसी के पास कूड़ेदान नहीं रखने चाहिए |
तुलसी के पास गन्दी चीजों को नहीं रखना चाहिए | 



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अगर आप कुछ सेवा करना चाहते है तो , गौ सेवा अवस्य करे |

प्रिया मिश्रा 

Tulsi plant opens the door to salvation

 

 
Tulsi worship is very important in Hindu religion, it is believed that Goddess Mahalakshmi resides in Tulsi plant.
By worshiping Mata Tulsi in the morning and evening and lighting a lamp, Mata Tulsi is pleased with her. Tulsi worship has special significance in the month of Kartik. It is said that this importance increases even more in the month of Kartik. Worshiping Tulsi in this month gives special results. The worship of Tulsi and Saligram in this month also has special significance, because in this month Tulsi Mata and Lord Shaligram were married.
It is described in the scriptures that if a Tulsi leaf is placed in the person's mouth at the time of death, the person attains salvation.
It is believed that by planting a Tulsi plant in the month of Kartik, the wishes of a person are fulfilled.
If after retiring from bath etc., worshiping Tulsi Mata and doing her circumambulation, Goddess Lakshmi is pleased with her. Purity is maintained by having Tulsi in the house.


By worshiping Tulsi, the devotee's body becomes pure like the fruit of many Chandrayan fasts.
Bathing by putting Tulsi in water gives the virtuous fruit of bathing in many pilgrimages.
Having a Tulsi plant in the house and in the courtyard keeps peace in the house.
Having a Tulsi plant in the house, the blessings of Mother Lakshmi always remain on the people of the house.
Consuming Tulsi plant by mixing curd and sugar daily gives many benefits.
Tulsi is helpful in eliminating all the material defects of the house.


Tulsi is the real incarnation of Mahalakshmi. Once upon a time, Mata Mahalakshmi had to take birth in the form of Tulsi on earth due to curse. Then Lord Vishnu blessed this Tulsi form of Mahalakshmi that you will continue to be worshiped in all the three worlds for ages.


What should not be kept near Mata Tulsi?

Slippers should not be kept near Tulsi.
A broom should not be kept near Tulsi.
Tulsi should not have dirty clothes.
Dustbins should not be kept near Tulsi.
Dirty things should not be kept near Tulsi.



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If you want to do some service, then do cow service.

Priya Mishra
 

 

 


तपस्विनी स्वयंप्रभा - किष्किन्धाकाण्ड (12)

 देवी स्वयंप्रभा 


रामचरितमानस के अनुसार  देवी स्वयंप्रभा मेरूसावर्णि की पुत्री थी जिसका जन्म भगवान् व्रह्मा के आशीर्वाद से हुआ था | जब भगवान् हनुमान अपनी वानर दल के साथ दक्षिण दिशा में माता सीता की खोज में निकले थे तब उनकी भेंट माता स्वम्प्रभा से हुई थी |

 
माता सीता को ढूंढ़ते -ढूंढ़ते जब वानर दल भूंख और प्यास से विचलित थे , तभी उन्हें एक गुफा दिखाई दी | उन्होंने उस गुफा में जाने का निश्चय किया | उस गुफा के अंदर कई प्रकार के मिष्ठान और फल रखे हुए थे | शीतल जल से भरे पात्र थे | इतनी सारी वस्तुएं जिससे वानर दल अपना पेट भर सकते थे | 

 
तभी वहां देवी स्वम्प्रभा प्रकट हुई और उन्होंने अपना परिचय दिया तथा अपने राज्यमहल और दानव राज मई के बारे में बताया और बताया की कैसे दानव राज मई के वध के पश्चात इस सुन्दर वन की रक्षा का भार उन्हें सौपा गया | 


यह सब जानने के पश्चात जामवंत ने अपना तथा वानर दल का परिचय दिया और यहाँ आने का कारन बताया | यह सुनकर माता ने वानर दल को वहाँ भोजन करने की अनुमति दे दी | इसके पश्चात् माता स्वम्प्रभा ने वानर दल की सहायता करने की सोची और उन सब को समुद्र तट पर पहुंचा दिया | इसके पश्चात् माता बद्रिक आसरम की और प्रस्थान कर  गयी |  



स्वम्प्रभा जो की स्वम एक गन्धर्व की पुत्री थी , उन्होंने अपने तप से श्रीराम को प्रसन्न किया था तथा वरदान सवरूप श्रीराम की भक्ति तथा मोक्ष की कामना की थी |

समाप्त 


हरे कृष्णा
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धनयवाद || 

 

Devi Swayamprabha


According to Ramcharitmanas, Goddess Swayamprabha was the daughter of Merusavarni who was born with the blessings of Lord Brahma. When Lord Hanuman with his monkey group went out in search of Mother Sita in the south direction, then he met Mother Swamprabha.

 
While searching for Mother Sita, when the group of monkeys were disturbed by hunger and thirst, then they saw a cave. He decided to go to that cave. Many types of sweets and fruits were kept inside that cave. There were vessels filled with cold water. So many things with which the group of monkeys could fill their stomach.

 
Then Goddess Swamprabha appeared there and she introduced herself and told about her palace and the demon Raj May and told how after the slaying of the demon Raj May, she was entrusted with the task of protecting this beautiful forest.


After knowing all this, Jamwant introduced himself and the group of monkeys and told the reason for coming here. Hearing this, the mother allowed the monkey group to have food there. After this Mata Swamprabha thought of helping the monkey group and took them all to the beach. After this Mata Badrik went towards Asaram's departure.



Swamprabha, who was the daughter of a Gandharva, had pleased Shri Ram with her penance and as a boon had wished for the devotion and salvation of Shri Ram.

End


Hare Krishna
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Monday, July 26, 2021

सूर्य नमस्कार के १० फायदे क्या है ?

 सूर्य नमस्कार के १० फायदे क्या है ? 

 


 


सूर्य नमस्कार जिसे हम आम भासा में सूर्य प्रक्रिया भी कहते है,  यह शारीरिक तंत्र के लिए एक अभ्यास है –इसे सम्पूर्ण शरीर के व्यायाम रूप में लिया जा सकता है। सूर्य नमस्कार का प्रभाव पुरे शरीर में महसूस किया जा सकता है।  ये हमारे शरीर को ऊर्जा से भर देता है।  सूर्य नमस्कार का मतलब होता है , सूर्य के आगे झुकना उनका अभिनन्दन करना।  सूर्य नमस्कार आध्यात्मिक साधना के लिए भी बहुत उपयोगी है।  
सूर्य नमस्कार को ऐसे देखा जा सकता है की , हम जो कुछ भी खाते है या पीते है , वो सब सूर्य ऊर्जा के द्वारा ही सींचे गए होते है या दूसरी भासा में कहे तो सबमे सूर्य की ऊर्जा का कुछ स्त्रोत होता है।  हम मनुष्यो के जीवन में सूर्य ऊर्जा का बहोत महत्तव है।
सूर्य नमस्कार को कसरत के रूप में भी लिया जा सकता है।  सूर्य नमस्कार हमारी पीठ तथा हमारी मांशपेशियों को सुसज्जित तथा मजबूत करने में मदद करता है।  सूर्य नमस्कार के बाद यदि सूर्य के किरणों द्वारा चार्ज किया हुआ जल ग्रहण किया जाये तो सूर्य नमस्कार का दुगुना लाभ प्राप्त होता है।  

सूर्य नमस्कार शरीर को एक बेहतर आकार देता है।  परन्तु ये तभी पूरी तरह से फायदेमंद है जब आप इस प्रक्रिया के द्वारा सूर्य ऊर्जा को आत्मसात करना सिख लेते है।  सूर्य नमस्कार करने से आपकी ऊर्जा सूर्य की ऊर्जा से ताल -मेल बैठा लेती है , जिससे आप दिनभर ऊर्जावान महसूस करते है।  सूर्य नमस्कार में बारह मुद्रा या आम भासा में बारह आसान है।  सूर्य नमस्कार हमारी चेतना को जागृत करने के लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है।  हमारी शरीर के पांचों तत्वों से जोड़ने का काम भी सूर्य ऊर्जा करती है , जो की हमें सूर्य नमस्कार से प्राप्त होती है।  
सूर्य नमस्कार के बाद अगर शरीर को जरा आराम दे और शीघ्रता ना करते हुए दो से तीन घंटे का अंतराल नहाने में और सूर्य नमस्कार में  दे तो यह काफी लाभदायक होता है।  सूर्य नमस्कार में सूर्य त्राटक भी आ जाता है , जिसमे उगते सूर्य को लगातार देखने की प्रक्रिया है।  यह प्रक्रिया गर्मियों में सुबह के ५ या ५ : ३० के आस -पास की जा  सकती है तथा सर्दियों में  ६ या ६ : ३० तक किया जा सकता है।  सूर्य नमस्कार का भी यही समय अनुकूल माना जाता है।  आप सूर्य नमस्कार और सूर्य त्राटक दोनों ही सूर्य उदय के बाद एक घंटे तक ही कर सकते है , उसके बाद सूर्य से अल्ट्रावेव निकलने लगती है , जो शरीर के लिए हानिकारक है।

 

  हमारे शरीर में सात चक्र है।  सूर्य नमस्कार उन सात चक्रो को सुधा तथा संतुलित करने में सहायक सिद्ध होता है , परन्तु ये तभी पूरी तरह से काम करता है , जब इसे आत्मसात कर लिया जाए।  इन बारह चक्रो के आसान में बारह मंत्र बोले जाते है तथा बारह योगासन की प्रक्रिया होती है।  इन सारे मंत्रो का और योगासन का एक ही सरल अर्थ है।  सूर्य देव जो समस्त ब्रह्माण्ड में ऊर्जा के रूप में स्थित है उन्हें हमारा प्रणाम है

 

 सूर्य नमस्कार सूर्य की रौशनी में किया जाये तो ये अधिक फायदेमंद होता है।  क्योकि सूर्य को देव मन जाता है और ये ऊर्जा के भरपूर स्रोत है , तो इसके समक्ष ही इनको प्रणाम करना सही होगा ना।  हमारे ऋषि -मुनि भी सूर्य को अर्ध्य देने तथा उनके पूजा करने के बिधान के बारे में बताते है।  हमारे ज्योतिष शास्त्र में भी सूर्य का बहोत बड़ा महत्तव है ।  सूर्य को सभी ग्रहो का राजा भी कहा जाता है।  सूर्य को लेकर हमारी प्राचीन ग्रंथो में कई कहानियाँ भी है। श्रीमदभगवत पुराण के अनुसार सूर्य को ही सबसे पहले गीता का ज्ञान हुआ था। सूर्य  ज्ञान की दृस्टि से या फिर अध्यात्म की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण है।  
तो आईये जानते है सूर्य नमस्कार के बारह योगासनों के बारे में।  पहले नाम की चर्चा कर लेते है।  

१) प्रणामासन (Pranamasana - The Prayer Pose)


ये पहला योगासन नाम से ही स्पष्ट हो रहा है की , ये एक प्राथना की अवस्था है।  इसमें उच्चारण किया जाने वाला मंत्र है (ॐ मित्राय नमः (  इस मन्त्र का अर्थ है जो सबके लिए मित्र है ) ) सूर्यनमस्कार के पहले चरण में आज्ञा चक्र पर ध्यान लगाया जाता है।  इस प्रक्रिया में उच्छवास(लम्बी और गहरी श्वास लेना)  लिया जाता है। 

प्रणामासन के फायदे :- 

प्राणामासन शरीर के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है।
तंत्रिका तंत्र को आराम देता है।

२) हस्तउत्तनासन (Hasta Uttanasana - Raised Arms Pose) ।  

सूर्यनमस्कार के दूसरे चरण या योगासन को कहते है ,  हस्तउत्तनासन।  इस योगासन में भी हम सूर्य को नमस्कार करते है तथा इस प्रक्रिया में एक दूसरे नाम से या मंत्र से सूर्य देव को प्रणाम करते है।  वो मंत्र है (ॐ रवये नमः।( इस मंत्र का अर्थ है दीप्तिमान या दीप्तिमान।) )

हस्तउत्तनासन के फ़ायदे : -

 हस्तोत्तानासन पेट की मांसपेशियों को फैलाता है और टोन करता है।
यह छाती का विस्तार भी करता है, जिसके परिणामस्वरूप ऑक्सीजन का पूरा सेवन होता है, जिससे फेफड़ों की क्षमता का पूरी तरह से उपयोग होता है।

३ )

 हस्तपादासन (आगे की ओर झुकना) :- 

ये सूर्यनमस्कार का तीसरा योग है ,जिसमे शरीर को आगे की और झुकाना होता है। इसमें ध्यान को मणिपूरक केंद्र पर केंद्रित किया जाता है।  इस प्रक्रिया में श्वास को धीरे -धीरे छोड़ते हुए शरीर को आगे की और झुकाया जाता है।  इस योग में सूर्य मंत्र है ( ॐ सूर्याय नमः , जिसका अर्थ है जो गतिबिधि के कारक है।   सरल अर्थ में जो गतिबिधि उतपन्न करने के लिए जिम्मेदार है, तथा जो अन्धकार को दूर करने वाले है , उन सूर्य देव को हम प्रणाम करते है।  )


    हस्तपादासन  के फ़ायदे   :- कमर और रीढ़ को लचीला बनाता है।
    हैमस्ट्रिंग को फैलाता है।
    कूल्हों, कंधों और बाहों को खोलता है।

 

4)

 अश्व संचालनासन (घुड़सवारी मुद्रा)  :- 

ये सूर्यनमस्कार का चौथा योग है।  इस स्थिति में ध्यान बिशुद्धि चक्र पर होता है। इस योगासन में श्वास को भरते हुए बाएं पैर को पीछे की ओर ले जाना होता है । छाती को खींचकर आगे की ओर तानें। गर्दन को अधिक पीछे की ओर झुकाएं। टांग तनी हुई सीधी पीछे की ओर खिंचाव और पैर का पंजा खड़ा हुआ। इस योग में सूर्य मंत्र है ( ॐ भाववे नमः  (अर्थ:  वह जो रोशन या चमकीला हो।))

अश्व संचालनासन के फायदे :-

अश्व संचालनासन पैरों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
रीढ़ और गर्दन को लचीला बनाता है।
अपच, कब्ज और साइटिका के लिए अच्छा है।

 

 5)

दंडासन (स्टिक पोज)  :- 

ये सूर्य नमस्कार का पांचवा योग है। इस क्रिया में ध्यान 'सहस्रार चक्र' पर केन्द्रित होना चाहिए ।  इस योग क्रिया में श्वास को धीरे-धीरे बाहर की और निकालते हुए दाएं पैर को भी पीछे ले जाएं। दोनों पैरों की एड़ियां आपस में  मिली हुई हों। पीछे की ओर शरीर को खिंचाव दें और एड़ियों को पृथ्वी पर मिलाने का प्रयास करें। नितम्बों को अधिक से अधिक ऊपर उठाएं। गर्दन को नीचे झुकाकर ठोड़ी को कण्ठकूप( लैंप वेल )  में लगाएं। इस योग में सूर्य मंत्र है  ( ॐ खगया नमः (अर्थ: वह जो सर्वव्यापी है, जो आकाश में घूमता है। )

 दंडासन  के फ़ायदे :-  

दंडासन बाहों और पीठ को मजबूत करता है
मुद्रा में सुधार करता है।
कंधों, छाती और रीढ़ को स्ट्रेच करता है।
मन को शांत करता है।

 

6)

 अष्टांग नमस्कार (आठ भागों की मुद्रा के साथ नमस्कार  ) :- 

ये सूर्य नमस्कार का छठा योग है। इस योग में ध्यान को 'अनाहत चक्र' पर टिका दें और श्वास की गति सामान्य रखना होता है ।  इस स्थिति में श्वास भरते हुए शरीर को पृथ्वी के समानांतर, सीधा साष्टांग दण्डवत करें और पहले घुटने, छाती और माथा पृथ्वी पर लगा दें। नितम्बों को थोड़ा ऊपर उठा दें। श्वास छोड़ दें। इस योग में सूर्य मंत्र है ( ॐ पौशन नमः जिसका अर्थ है पोषण और पूर्ति का दाता। )

अष्टांग नमस्कार के फ़ायदे :- 

अष्टांग नमस्कार करने से  पीठ और रीढ़ की हड्डी  में लचीलापन आता  है तथा पीठ की मांसपेशियां मजबूत होती है ।ये योग तनाव और चिंता को कम करने में काफी फायदेमंद है।

  


7)

भुजंगासन (कोबरा मुद्रा) :- 

ये सूर्य नमस्कार का सातवां योग है। इस स्थिति में आपका ध्यान मूलाधार चक्र पे होना चाहिए।  इस योग में धीरे-धीरे श्वास को भरते हुए छाती को आगे की ओर खींचते हुए हाथों को सीधे कर दें। गर्दन को पीछे की ओर ले जाएं। घुटने पृथ्वी का स्पर्श करते हुए तथा पैरों के पंजे खड़े रहें। इस योग का मंत्र है  ( ॐ हिरण्य गर्भाय नमः जिसका अर्थ है जिसके पास सुनहरे रंग का तेज है।


भुजंगासन कंधो , छाती और पीठ को फैलता है तथा लचीलापन बढ़ाता है ।ह्रदय को स्फूर्ति प्रदान करता है।  



8)

अधोमुक्त श्वानासन :-

 इसे हम सामान्य भासा में पर्वतासन (पर्वत मुद्रा) भी कहते है।   ये सूर्य नमस्कार का आँठवा योग है।  इसमें ध्यान को सहस्रार चक्र पर केंद्रित किया जाता है।  इस योग में  श्वास को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए  हुए दाएं पैर को भी पीछे ले जाना होता है । दोनों पैरों की एड़ियां आपस में मिलनी चाहिए तथा पीछे की ओर शरीर को खिंचाव देकर एड़ियों को पृथ्वी पर मिलाने का प्रयास करें। नितम्बों को अधिक से अधिक ऊपर उठाएं। गर्दन को नीचे झुकाकर ठोड़ी को कण्ठकूप में लगाएं। ध्यान 'सहस्रार चक्र' पर केन्द्रित करने का अभ्यास करें। इस योग का मंत्र है (ॐ मरीचये नमः जिसका का अर्थ है अनंत किरणों वाला प्रकाश दाता।)

पर्वतासन (पर्वत मुद्रा)  :- पर्वतासन हाथों और पैरों की मांसपेशियों को मजबूत करता है।
रीढ़ की हड्डी के क्षेत्र में रक्त के प्रवाह को बढ़ाता है। 


9)

अश्व संचालनासन (घुड़सवारी मुद्रा)  :-

ये सूर्य नमस्कार का नवा योग है। इस योग में विशुद्धि चक्र पर ध्यान लगाया जाता है।   इस योग की प्रक्रिया में श्वास को भरते हुए बाएं पैर को पीछे की ओर ले जाएं। छाती को खींचकर आगे की ओर तानें। गर्दन को अधिक पीछे की ओर झुकाएं। टांग तनी हुई सीधी पीछे की ओर खिंचाव और पैर का पंजा खड़ा हुआ। इस योग में सूर्य मंत्र है ( ॐ आदित्याय नमः , जिसका अर्थ है अदिति का पुत्र, ब्रह्मांडीय दिव्य मां।)

घुड़सवारी मुद्रा के फ़ायदे :-     

अश्व संचालनासन योग को करने से  पेट के अंग टोन होते है तथा पैर की मांसपेशिया लचीली बनती है।  

 

 10)

 हस्त पदासन 

 कार्यान्वयन: साँस छोड़ें और पैरों को एक साथ खींचे, दाहिने पैर को सामने रखें (आसन 3 के समान)। बस अपने घुटनों को इतना मोड़ें कि आपकी छाती आपकी जांघों पर टिकी रहे और आपका सिर आपके घुटने पर टिका रहे।

 

  फ़ायदे: 

 

  इससे अनिद्रा, ऑस्टियोपोरोसिस, सिरदर्द, चिंता और तनाव सभी को कम किया जा सकता है।

 

11)

हस्त उत्तानासन 

उसके बाद, एक गहरी सांस लें और अपनी बाहों को अपने सिर के ऊपर और ऊपर की ओर फैलाएं (जैसे मुद्रा 2) ऊपर देखें और अपने शरीर को थोड़ा पीछे की ओर बढ़ाने के लिए अपने श्रोणि को आगे की ओर दबाएं। गहरी सांस छोड़ें।

 फ़ायदे: 

  यह अस्थमा, पीठ के निचले हिस्से में दर्द और थकान जैसी बीमारियों का इलाज करता है।  

यह पाचन में भी मदद करता है।  

छाती का विस्तार करता है, जिसके परिणामस्वरूप पूर्ण ऑक्सीजन का सेवन होता है।

 

 12. उर्ध्व हस्तासन

 

  श्वास लें और अपनी भुजाओं को भुजाओं तक पहुँचाएँ और एक बार फिर उर्ध्वा हस्तासन में उपर की ओर पहुँचें।

 

 फ़ायदे: 

  जांघों, घुटनों और टखनों को मजबूत किया जाता है, और मुद्रा में सुधार होता है।  

अपनी भावनाओं पर नियंत्रण विकसित करने में आपकी सहायता करने के लिए अपने कूल्हों और पेट और अपनी मांसपेशियों को टोन करें।

 

 

1. पाचन तंत्र को मजबूत करता है | (Strengthens the digestive system)|

यदि आप प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करें, तो आपका पाचन तंत्र मजबूत हो सकता है। इससे आपकी पेट संबंधित समस्या दूर हो सकती है।

 

2. शरीर में लचीलापन लाता है | ( Brings flexibility in the body.)


सूर्य नमस्कार एक अच्छा व्यायाम माना जाता है। यदि आप प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करें, तो इससे आपके शरीर में लचीलापन पैदा हो सकता है और आपको झुकने उठने में आसानी होगी।

 

3.  वजन को कंट्रोल करता है | (Controls the weight )


यदि आप मोटापे की समस्या से परेशान है, तो सूर्य नमस्कार आपके लिए बेहद फायदेमंद होगा। इसे करने से शरीर पर जोर पड़ता है और आपकी अनावश्यक चर्बी धीरे-धीरे कम हो सकती है।

 

4. शारीरिक मुद्राओं में  सुधार लाता है। (4. Improves physical postures.)


यदि आप बैठने वाला काम ज्यादा कर रहे हो, तो आपके लिए सूर्य नमस्कार बेहद फायदेमंद हो सकता है। सूर्य नमस्कार करने से शरीर का दर्द खत्म होता है।

 

5. हड्डियों को मजबूत करता है। (Strengthens bones.)

सूर्य से निकलने वाली विटामिन डी हमारे हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। यदि आप प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करें, तो हड्डी से संबंधित बहुत सारी बीमारियां दूर हो सकती है।

6. तनाव में लाभदायक

सूर्य नमस्कार करते समय हम लंबी सांस लेते है, जिसकी वजह से हमारे शरीर में होने वाली बेचैनी और तनाव बहुत हद तक दूर होती है। यदि आप प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करें, तो अपका तनाव बहुत हद तक दूर कर सकता है।

 

7. कब्ज दूर करे

झुकने वाले कामों को करने से कब्ज की समस्या कभी भी नहीं होती है। यदि आप सूर्य नमस्कार प्रतिदिन करें, तो आपकी कब्ज की शिकायत बहुत हद तक दूर हो सकती है।

 

8. अनिद्रा की समस्या |

सूर्य नमस्कार करने से शरीर को राहत मिलती है। इसकी वजह से हमें नींद अच्छी आती है। यदि आप प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करें, तो आपकी अनिद्रा की समस्या बहुत हद तक दूर हो सकती है।

 

9. ब्लड सर्कुलेशन को ठीक रखने में लाभदायक

सूर्य नमस्कार करने से शरीर में खून का संचार तेजी से होता है। इससे पूरे शरीर को एनर्जी मिलती है और हम किसी काम को करने में समर्थ रहते है। यदि आप प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करें, तो आपका ब्लड सर्कुलेशन हमेशा ठीक रह सकता है।

10. पीरियड

महिलाओं में पीरियड सही समय पर ना होने की समस्या अक्सर सुनने को मिलती है। यदि आप प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करें, तो इस आपके शरीर में हार्मोस बैलेंस रह सकता है और पीरियड हमेशा सही समय पर हो सकता हैं।

11.  त्वचा को रखे खूबसूरत

सूर्य नमस्कार करने से कब्ज की समस्या आसानी से दूर होती है। आपको बता दें, कि कब्ज की वजह से ही ज्यादातर त्वचा की समस्या उत्पन्न होती है। यदि आप प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करें, तो आपके चेहरे की झुर्रियां बहुत हद दूर हो सकती है।

12. मन की एकाग्रता

प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करने से वात पित्त और कफ जैसी समस्या शांत होती हैं। डॉक्टरों के अनुसार ऐसी समस्या उत्पन्न होने से मन की एकाग्रता खत्म हो जाती है। यदि आप प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करें, तो आपको इस तरह की बीमारियों से निजात मिल सकता है और आपकी मन की एकाग्रता सही बनी रह सकती हैं।

 

 

 

 1. Strengthens the digestive system .

If you do Surya Namaskar daily, your digestive system can be strengthened. This can solve your stomach related problems.

2. Brings flexibility in the body .


Surya Namaskar is considered a good exercise. If you do Surya Namaskar daily, it can create flexibility in your body and make it easier for you to bend over.

3. Controls Weight.


If you are troubled by the problem of obesity, then Surya Namaskar will be very beneficial for you. By doing this, the body gets stressed and your unnecessary fat can be reduced gradually.

4. Improves physical postures.


If you are doing more sitting work, then Surya Namaskar can be very beneficial for you. By doing Surya Namaskar, body pain ends.


5. Strengthens bones.

Vitamin D from the sun helps in making our bones strong. If you do Surya Namaskar daily, then many diseases related to bone can be cured.

6. Beneficial in stress

While doing Surya Namaskar, we take long breaths, due to which the restlessness and stress in our body goes away to a great extent. If you do Surya Namaskar daily, then your stress can be removed to a great extent.

7. Relieve Constipation

Constipation is never a problem by doing bending works. If you do Surya Namaskar daily, your constipation problem can go away to a great extent.

8. Insomnia problem.


Surya Namaskar gives relief to the body. Due to this we get good sleep. If you do Surya Namaskar daily, your insomnia problem can be overcome to a great extent.

9. Beneficial in maintaining blood circulation

By doing Surya Namaskar, the circulation of blood in the body becomes faster. This gives energy to the whole body and we are able to do any work. If you do Surya Namaskar daily, your blood circulation can always be fine.

10. Period

In women, the problem of not having periods at the right time is often heard. If you do Surya Namaskar every day, then this can maintain the hormonal balance in your body and periods can always happen at the right time.

11. Keep Skin Beautiful

By doing Surya Namaskar, the problem of constipation is easily removed. Let us tell you that most of the skin problems arise due to constipation. If you do Surya Namaskar daily, the wrinkles on your face can be removed to a great extent.

12. Concentration of Mind

By doing Surya Namaskar daily, problems like Vata, Pitta and Kapha are pacified. According to doctors, due to such a problem, the concentration of the mind ends. If you do Surya Namaskar daily, then you can get rid of such diseases and your concentration of mind can remain correct.

 

 


 



 

 

 

 

 

 

 




 


 

Wednesday, July 21, 2021

टॉप फाइव आयल फॉर हेयर ग्रोथ

टॉप फाइव आयल फॉर हेयर ग्रोथ 

 

अपनी व्यस्तता भरे जीवन में हम अपना ध्यान रखना भूलते जा रहे है।  हमारे शरीर को स्वक्षता की काफी जरुरत होती है। हम अपने शरीर की स्वक्षता का ध्यान रखते भी है , लेकिन हम प्रकिर्तिक रूप से नहीं रख पाते है , जिसके कारन हमें कई सारी  समस्याओ का सामना करना पड़ जाता है। अगर हमारी खूबसूरती की बात की जाये तो उसमे सबसे पहले हमारे बाल आते है , बालों की खूबसूरती हमारी खूबसूरती तय करती है।  
बाल बहोत ही नाजुक होते है , वो थोड़े ही समय में , गन्दगी से , विटामिन की कमी से , अनुवांशिकता के कारन टूटने लगते है।  इन्हे सुरक्षित रखना काफी कठिन हो जाता है, जब इनके टूटने का रेट सबसे जायदा हो।  
लेकिन हमारे प्राचीन ग्रंथो के अनुसार आज भी कई ऐसे तेल है जो बालो के लिए सबसे जायदा उपयोगी माने  जाते है।  
जिनमे पहले आता है , 

सरसो का तेल (Mustard oil )

सरसो का तेल अपने गुणों के कारन कई तरह के समस्याओ में औषधि के रूप में काम में आता है।  सरसो का तेल बहुत ही पौष्टिक माना जाता है ।  इसका प्रयोग खाने में  भी किया जाता है।गर्म तासीर होने के कारन ये सर्दियों में काफी लाभदायक होता है। सरसो के तेल में कुछ ऐसे पोषक तत्व पाए जाते है जो बालो के लिए काफी लाभदायक है । ये बालो के जड़ से मजबूत बनाता है।  सरसो के तेल से मालिश से रक्त संचार अच्छा होता है। 


अगर आप रूखे बालो से परेशान है तो , इसमें सरसो का तेल बहोत ही लाभदायक है।  सरसो के तेल से खुश्की जैसे समस्याओं में भी लाभ मिलता है।  नहाने के कुछ घंटे पहले सरसो तेल से बालो को मसाज करने से बाल नरम , मुलायम और चमकदार बनते है।  सरसों के तेल में सेलेनियम, ओमेगा-3 फैटी एसिड और प्रोटीन पाया जाता है, जिनमें एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं।इसमें विटामिन बी-3 यानी नियासिन भी मौजूद होता है। साथ ही मिनरल के तौर पर इसमें मैग्नीशियम, कैल्शियम और जिंक की अच्छी मात्रा उपस्थित रहती है।  ये सभी तत्व बालो के लिए काफी उपयोगी होते है।  सरसों तेल के प्रयोग से तनाव से भी मुक्ति मिलती है। 

 

 

  जैतून का तेल ( Olive oil )

 

 जैतून का तेल  सिर्फ आपके खाने को ही हेल्दी नहीं बनाता बल्कि इसे बालों में लगाने से बाल भी हेल्दी हो जाते हैं। आज कल हर दूसरे और चौथे  व्यक्ति किसी न किसी प्रकार की बालों की समस्या से परेशान है। आइये हम जानते हैं , कि जैतून का तेल  किन- किन बालों की समस्याओं से हमें बचाता है ।
निम्बू बालो को डैंड्रफ से बचाता है तथा जैतून का तेल बालों को नमी प्रदान करता है, तथा स्केल्प में नए परतो को लाने में मदद करता है।  अगर नींबू और जैतून के तेल को मिक्स करके लगाया जाये तो बालो को डैंड्रफ की समस्या से बचाया जा सकता है।  जैतून का तेल आपको दोमुहे बालो से भी छुटकारा दिलाता है।  अगर जैतून के तेल को गर्म(हल्का गुनगुना करना , एक कटोरे में पानी ले गर्म सा फिर उसमे एक छोटे कटोरे में तेल करके रख दे इससे तेल आसानी से गर्म हो जाता है , और इसके पोषक तत्वा भी बने रहते है )  करके तथा उसमे अदरक का जूस  मिक्स करके  लगाने से ये दोमुहे बालो से भी निजात दिलाता है तथा बालों के ग्रोथ में भी लाभदायक होता है। जैतून का तेल बालो को शाइनी बनाने के भी काम आता है। 


कैस्टर का तेल (इसे हिंदी में अरंडी का तेल भी कहते है )

 

कैस्टर के तेल का इस्तेमाल लोग भोजन में करते है, साथ ही साथ इसे बालों के ग्रोथ में उपयोग में लगाया जाता है।
अधिकतर लोग बालों को पोषण देने के लिए नारियल तेल या सरसों का तेल लगाते हैं, लेकिन जल्दी काले, घने और मजबूत बाल चाहिए, तो आपको  कैस्टर के तेल का इस्तेमाल करना शुरू कर देना चाहिए । कैस्टर ऑयल बालों के लिए काफी हेल्दी माना जाता है । बालों के साथ ही यह त्वचा  और कई शारीरिक रोगों से भी बचाए रखता है। कैस्टर ऑयल कब्ज की समस्या का बेहतर इलाज है। कई तरह के स्किन केयर प्रोडक्ट्स को तैयार करने में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेट्री और एंटी-माइक्रोबियल गुण होते हैं, जो कई रोगों को दूर रखते हैं।
कैस्टर का तेल लगाने से बालो को पोषक तत्व मिलता है , इसमें कैस्टर ऑयल में रिसिनोलेइक एसिड के साथ ही ओमेगा- 6 एसेंशियल फैटी एसिड्स भी होता है, जो रक्त संचार को सही करता है तथा बालों के ग्रोथ में लाभदायक सिद्ध होता है। कैस्टर ऑयल में एन्टी-वायरल, एन्टी-बैक्टीरियल और एन्टी-फंगल गुण मौजूद होते हैं, जो स्कैल्प में होने वाले हर तरह के इंफेक्शन, डैंड्रफ आदि की समस्या को दूर करता है।
कैस्टर का तेल लगाने से बालो की खुश्की की समस्या से निजात मिलता है।  
कैस्टर के तेल को दही में मिलकर लगाने से बालो में नमी आती है तथा डैंड्रफ की समस्या से भी निजात मिलता है। 

 

 प्याज का तेल (Onion oil )

 

प्याज का तेल पहले के दो तेलों की तरह काफी फायदेमंद होता है।  लेकिन इसका सबसे बड़ा फ़ायदा ये है की , इसे आसानी से घर पे बनाया जा सकता है।  इसे सरसों के तेल के साथ मिक्स करके और जैतून के तेल के साथ मिक्स करके या यूँ कहे तो , किसी भी तेल के साथ मिक्स करके लगाया जा सकता है।  प्याज का तेल बालों को नमी प्रदान करता है , ये हेयर ग्रोथ में भी लाभदायक होता है।  सफ़ेद प्याज का जूस भी बालो में आप तेल में मिक्स करके लगा सकते है , ये भी काफी लाभदायक होता है। बालो में रक्त संचार सही करने में प्याज का तेल बहुत फायदेमंद है। प्याज का तेल हमें दोमुहे बालो की समस्या से भी छुटकारा दिलाता है। 

 

 

नारियल का तेल ( Coconut oil )


 सभी भारतीय घरो में पाया जाने वाला तेल है ये, नारियल का तेल।  इसे इंग्लिश में कोकोनट आयल भी कहते है। नारियल का तेल बालों में लगाने से बाल तेजी से बढ़ते हैं। नारियल तेल में पाए जाने वाले एसेंशियल फैटी एसिड और विटामिन बालों की जड़ों के आसपास जमा होने वाले सीबम को हटा देते हैं। सिर के बालों की जड़ो में नारियल तेल को गर्म करके लगाना , डेंड्रफ से निजात दिलाता है।  नारियल तेल को दही में मिलकर लगाने से बालों को बढ़ने में मदद मिलती है तथा बाल मुलयम और चमकदार बनते है।
नारियल तेल में बड़ी मात्रा में विटामिन और माइक्रो न्यूट्रीएंट्स पाए जाते हैं। जो बालों को पोषक तत्व प्रदान करते है।  नारियल तेल को अगर गरम करके लगाया जाये तो सभी तरह के मस्तिष्क बिमारियों से कुछ हद तक छुटकारा पाया जा सकता है।  मानशिक तनाव को दूर करने के लिए नारियल तेल को गुनगुना करके उसे हलके हाथो से मालिश किया जाता है। 

 

 

बादाम का तेल  (Almond oil )

 बचपन से हम खातें आये है बादाम , बादाम हमारी मेमोरी को बढ़ता है तथा यह हमारे कोलेस्ट्रॉल को भी कम करता है।  किसी को यदि अपना वजन कम करना होतो वो बादाम का प्रयोग करे।
बादाम पोषक तत्वों का पावर हाउस है। बादाम का तेल विटामिन ई, मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड, प्रोटीन, पोटेशियम और जिंक से भरपूर है। बादाम में इसके अलावा कई अन्य खनिज और विटामिन भी हैं।बादाम में बड़ी मात्रा में विटामिन ई, ओमेगा 3 और 6 फैटी एसिड पाए जाते हैं।
बादाम का तेल भी बादाम की तरह ही पोषक तत्वों से भरपूर है।  ये बालों के हेल्थ के लिए काफी फायदेमंद होता है।  बालो के ग्रोथ की बात हो या फिर बालों को मुलायम करने की बात हो , बादाम का तेल रामबाण माना जाता है।  बादाम के तेल से दोमुहे बालों  की समस्या भी ख़त्म हो जाती है।  तथा ये सिरदर्द के रोगियों के लिए काफी फायदेमंद है।
बादाम का उपयोग न सिर्फ भारत बल्कि मिडिल ईस्ट, और उत्तरी अफ्रीका में सैकड़ों साल से पारंपरिक आसान घरेलू उपायों में किया जाता रहा है। ये तेल भारत में नारियल तेल के अलावा, कई पीढ़ियों द्वारा सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला हेयर ऑयल है। 



नीम तेल (Neem oil )

विटामिन E से भरपूर नीम तेल के बारे में सुना होगा आपने।  नीम का तेल बालो से खुश्की दूर करने के साथ -साथ जुवों को भी जड़ से ख़त्म करता है।  नीम का तेल कई औषधीय गुणों से भरपूर है। नीम तेल  को नित्य लगाने से ये बालों के बढ़ने में मदद करता है।  नीम के तेल से बालो में किसी भी तरह का इन्फेक्शन नहो हो सकता है।  नीम के तेल के प्रयोग से बालो में डैंड्रफ की समस्या भी जाती रहती है।  नीम के तेल को सरसो के तेल में मिला के लगाने से इसकी गुणवत्ता और भी बढ़ जाती है।  नीम के तेल को नाभि में लगाने से पुरे शरीर में इन्फेक्शन होने का खतरा कम होता है।  नीम का तेल बहुउपयोगी तेलों में से एक है।  

 


 











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पीएम नरेंद्र मोदी जी का एक और ऐतिहासिक फ़ैसला जिसने हमारे पूज्य प्रधानमंत्री जी के गौरव के साथ - साथ भारत के भी सम्मान को भी बढ़...